Monday, 3 June 2019

ममता का साया

कुछ परिस्थितिया  सामने ऐसे  आयी 
की  मानो  लेहरो  सा  उछल  के  तूफान  सा  नीचे  पटक  गिरा  हूँ
न  पैरो  तले ये  ज़मीन  बची 
न  छत  पर  अस्मा
बस  डर के  सेहम  सा  गया  हो ||

कुछ  पता  ना  चला , क्या  हो  गया  एक  दम  से  ज़िन्दगी  में 
आँख  खोल  के , बन  कर  के  बस  अँधेरा  ही  अँधेरा  नज़र  आ  रहा  था
कोशिश  थी  खुद  को  संभालने  की  मगर  खुद  को  ही  बिगड़  रहा  था
कुछ  ऐसा  असर  था  इस  तूफान  का  की  कुछ  समज  ही  नही  आ  रहा  था ||

फिर  धीरे  से  सर  पर  किसने  हाथ  सा  फैरा 
जिसने   चलना  सिखाया  था  आज  उसने  फिर  उठना  सिख्या 
जितना  अकेला  था  में  उस  दौर  में  मेरी  माँ  ने  फिर  मुझे  5  साल  के  बच्चे   की   तरह  सब  कुछ  सिख्या , उत्साह  बढ़ाया
कितना  अकेले  सा  हो  गया  था  मै  मगर  उसके  साये  ने  मुझे  सहरा  दिलाया
जहाँ  लोगो  ने  मुझे  मुझसे  ही  प्यार  करना  भुला  दिया  था 
वहाँ  माँ  ने  मेरी  सिसकियों  को  सीने  से  लगा  के  चुप  करया ||

कहने  को  है  बहुत  से  रोग  मेरी  माँ  को
पर  देख  के   लगता   है  बस  उसको  मेरी  ही  चिंता  है
भगवन  ने  ना   जाने  क्या  सोच  कर  माँ  को  बनाया
माँ  ने  अपनी दुनिया  छोड़  के बस  अपना  जीवन  अपनी  बचे  के  इर्द  गिर्द  घुमाया
ना   जाने  क्या  सोच  के  भगवन  माँ  को  बनाया  ||

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