Saturday, 15 November 2014

हमरी सुनहेरी दोस्ती


मिले तो लोग हज़ार इस दुनिया मे,
मगर तुमसा नही देखा |
दोस्त भी थे हज़ारो से,
 मगर तुमसा नही था ||

बदलते हुए वक़्त ने थमा इस दोस्ती को,
ओर हमरी वफ़ाई ने सीचा इस रिश्तेओ को  |
जितना सोचा था उससे zadaaaada  ह्मे मिला
पहेली  बार ह्मने आखे बंद कर  के  सिर्फ़ दिल  ही दिल सौचा
ओर्ऱ प|या तुम हो मेरे साथ चाहते कितनी बी फालतू हो बात…. J

श्यद ये खुदा का तोफा था या तुम्हारा ऐतबार
ह्मे मिला ऐसा दोस्त पहेली  बार
ओर ह्मने किया इस बात का एजहार बार बार ||

समज़ नही आता
करे ह्म खुदा पर नाज़ या  तुम पर
फिर सोचा कर लेते  है अपनी दोस्ती पर नाज़ ||

जब मिले नही थे तुमसे, तो सब को हॅस के दोस्त बना  लिया करते थे
अब तो जानने वालो को भी दोस्ती का मतलब से आनज़न बता दिया करते है

चाहे हो आज या हो कल
रहेगी हमरी दोस्ती हमेशा हर पल ||


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