हे जो मेरे ये आसो
इन पर नहीं है मेरा कोई बस
कितना बी चाहो मै इन्हें छिपाना
पर इन आंसुओ ने मेरी कभी एक ना माना ।
चाहे हो ख़ुशी या हो गम
ये हमेशा आ जाते है मेरे संग ।
नहीं चाहती इन्हें बटना किसी से
कही देखा बड़ा दिए उसी ने इसके और करण ।
हे जो मेरे ये आसो
इन पर नहीं है मेरा कोई बस
लगते है खुबसूरत
है ये जैसे-
पते पर बेठी ओंस की बूंद जैसे ।
लेकिन किसी को क्या पता
इनके पीछे है राज कितने घेरे से ।
नमकीन सा है इनका स्वाद
लगता है कुछ कहेना चाहते है ये कोई बात ।
हे जो मेरे ये आसो
इन पर नहीं है मेरा कोई बस । ।
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